Shloka & Mantra


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श्लोक एवं मंत्र

❖ प्रात: कर दर्शन :

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥


❖ पृथ्वी क्षमा प्रार्थना :

समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमंडिते। विष्णु पत्नि नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमस्व मे॥


❖ स्नान मंत्र :

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती। नर्मदे सिन्धु कावेरी जलेस्मिन् सन्निधिं कुरु॥


❖ गायत्री मंत्र :

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।


❖ महामृत्युंजय मंत्र :

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥


❖ गुरु मंत्र :

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥


❖ एक श्लोकी रामायण :

आदौ रामतपोवनादि गमनं हत्वा मृगं कांचनम्। वैदेही हरणं जटायु मरणं सुग्रीवसम्भाषणम्॥ बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनम्। पश्चाद्रावण कुम्भकर्णहननं एतद् श्री रामायणम्॥


❖ श्री राम वंदना :

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्। कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥


❖ श्री रामाष्टक :

हे रामा पुरुषोत्तमा नरहरे नारायणा केशवा। गोविन्दा गरूड़ध्वजा गुणनिधे दामोदरा माधवा।। हे कृष्ण कमलापते यदुपते सीतापते श्रीपते। बैकुण्ठाधिपते चराचरपते लक्ष्मीपते पाहिमाम्।।


❖ श्री शिव स्तुति :

कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसार सारं भुजगेन्द्रहारं। सदा वसंतं हृदयारविन्दे, भवं भवानी सहितं नमामि॥


❖ श्री कृष्ण स्तुति :

कस्तूरी तिलकं ललाटपटले, वक्षस्थले कौस्तुभं। नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले, वेणु करे कंकणम्॥ सर्वांगे हरिचन्दनं सुललितं, कंठे च मुक्तावलि। गोपस्त्री परिवेष्टितो विजयते, गोपाल चूडामणी॥ मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्। यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम्॥


❖ श्री विष्णु स्तुति :

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥


❖ श्री आदिशक्ति वंदना :

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥


❖ श्री सरस्वती वंदना :

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वींणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपदमासना॥ या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा माम पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्याऽपहा॥


❖ श्री हनुमंत वंदना :

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्। दनुजवनकृषानुम् ज्ञानिनांग्रगणयम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्। रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥ मनोजवं मारुततुल्यवेगम जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणम् प्रपद्ये॥


❖ सूर्य नमस्कार :

ॐ सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च।। आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने। दीर्घमायुर्बलं वीर्यं व्याधि शोक विनाशनम् सूर्य पादोदकं तीर्थ जठरे धारयाम्यहम्॥ ॐ मित्राय नम: ॐ रवये नम: ॐ सूर्याय नम: ॐ भानवे नम: ॐ खगाय नम: ॐ पूष्णे नम: ॐ हिरण्यगर्भाय नम: ॐ मरीचये नम: ॐ आदित्याय नम: ॐ सवित्रे नम: ॐ अर्काय नम: ॐ भास्कराय नम: ॐ श्री सवितृ सूर्यनारायणाय नम: आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम भास्कर। दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥


❖ नवग्रह स्मरण :

ब्रह्मा मुरारी स्त्री पुरान्तकारी भानु: शशि भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्र: शनि राहु केतव: कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्॥


❖ स्वस्ति वाचन :

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥


❖ यजमान तिलक मंत्र :

पुनः ब्राह्मण यजमान के ललाट पर कुंकुम तिलक करें। ॐ आदित्या वसवो रुद्रा विश्वेदेवा मरुद्गणाः। तिलकान्ते प्रयच्छन्तु धर्मकामार्थसिद्धये।


❖ शिखाबन्धन मंत्र :

ॐ मानस्तोके तनये मानऽआयुषि मानो गोषु मानोऽअश्वेषुरीरिषः। मानोव्वीरान् रुद्रभामिनो व्वधीर्हविष्मन्तः सदमित्त्वा हवामहे ॐ चिद्रूपिणि महामाये दिव्यतेजः समन्विते। तिष्ठ देवि शिखाबद्धे तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे।।


❖ आचमन मंत्र :

ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः। तीन बार आचमन कर आगे दिये मंत्र पढ़कर हाथ धो लें। ॐ हृषीकेशाय नमः।। पुनः बायें हाथ में जल लेकर दाहिने हाथ से अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर निम्न श्लोक पढ़ते हुए छिड़कें। ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।। ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु ॐ पुण्डरीकाक्षः पुनातु।


❖ आसन शुद्धि मंत्र :

ॐ पृथ्वि! त्वया धृता लोका देवि ! त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि ! पवित्रां कुरु चासनम्।।


❖ छन्दोग जनेऊ मंत्र :

ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वोपवितेनोपनह्यमि।


❖ वाजसनेयि जनेऊ मंत्र :

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं, प्रजापतेयर्त्सहजं पुरस्तात्। आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं, यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।


❖ दूर्वाक्षत मंत्र :

ॐ आब्रह्मन् ब्राह्मणो ब्रह्मवर्चसी जायतामाराष्ट्रे राजन्य: शूरऽइषव्योऽतिव्याधी महारथो जायतां, दोग्ध्री धेनुर्वोढानड्वानाशुः सप्तिः पुरन्ध्रिर्योषा जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवास्य यजमानस्य वीरो जायताम् , निकामे निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु, फलवत्यो न ऽओषधयः पच्यन्ताम् योगक्षेमो नः कल्पताम्। 


❖ संध्या दीप दर्शन :

शुभं करोतु कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तु ते॥ दीपो ज्योतिः परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते॥



मंदिर का पता

देवहार, अंधराठाढ़ी, मधुबनी,
बिहार, पिनकोड 847224, IN

समय - सारणी

प्रातः 05:00 AM - अपराह्न 12:00 PM
अपराह्न 04:00 PM - रात्रि 09:00 PM
प्रातःकालीन महाश्रृंगार एवं महाआरती 05:30 AM
संध्याकालीन महाश्रृंगार एवं महाआरती 08:30 PM

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