सामान्य पूजा पद्धति


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सामान्य पूजा पद्धति

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण पूजा सामग्री और पूजा विधियाँ निम्न प्रकार हैं:

पूजन सामग्री : रोली, चन्दन, अक्षत, दूध, दही, गौमाता घी, शहद, शक्कर, गंगाजल, इत्र, अष्टगंध, जनेऊ, मौली, पान, गोल सुपारी, लौंग, इलायची, दीपक, पंचमेवा, दक्षिणा, ऋतुफल, जलदार नारियल, गुलाल, दूर्वा, बेलपत्र, पुष्प आदि।

पंचोपचार पूजन

पांच उपचार पूर्वक की जाने वाली पूजा

दशोपचार पूजन

दस उपचार पूर्वक की जाने वाली पूजा

षोडशोपचार पूजन

सोलह उपचार पूर्वक की जाने वाली पूजा

द्वात्रिंशोपचार पूजन

बत्तीस उपचार पूर्वक की जाने वाली पूजा

चतुष्षष्टयोपचार पूजन

चौंसठ उपचार पूर्वक की जाने वाली पूजा

एकोद्वात्रिंशोपचार पूजन

एक सौ बत्तीस उपचार पूर्वक की जाने वाली पूजा

❖ पवित्रीकरण

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्यभ्यन्तरः शुचिः॥

❖ आचमन

आचमन मंत्र : ऊँ माधवाय नमः, ऊँ केशवाय नमः, ऊँ नारायणाय नमः इसके बाद ऊँ हृषिकेषाय नमः बोलते हुए हाथ धो लें।

❖ आसन पूजा

सामग्री में से रोली/चन्दन, अक्षत एवं पुष्प द्वारा अपने आसन की पूजा करें (आसन के नीचे त्रिकोण का चिन्ह बनायें रोली या चंदन से) निम्न मंत्र बोलते हुए: ऊँ पृथ्वि त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरू चासनम्।।

❖ शिखा बंधन

शास्त्रों में शिखा या चोटी को ही ऊर्जा का स्तोत्र माना गया है इसलिए शिखा बंधन का विधान है, निम्नलिखित मंत्र बोलते हुए शिखा बंधन का उपक्रम करें: ॐ चिद्रूपिणी महामाये दिव्यतेजः समन्विते। तिष्ठ देवि शिखामध्ये तेजोवृद्धिं कुरूष्व मे॥

❖ संकल्प

दाहिने हाथ में अक्षत, जल, चन्दन/रोली, एक सिक्का, एवं पुष्प लेकर निम्न मंत्र पढ़ें: ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः, श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विष्णोराज्ञया प्रवर्त्तमानस्य अद्य श्री ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेत वाराह कल्पै वैवस्वत मन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे युगे कलियुगे कलि प्रथमचरणे भूलोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखंडे आर्यवर्तान्तरगतेदेशे अमुक नगरे अमुक ग्रामे अमुक नाम संवत्सरे अमुक ऋतौ मासोत्तममासे अमुक मासे अमुक पक्षे अमुक तिथौ अमुक वासरे अमुक नक्षत्रे अमुक योगे अमुक करणे अमुक राशिस्थिते चन्द्रे अमुक राशिस्थिते सूर्य शुभ राशि स्थिते देवगुरौ शेषेषु ग्रहेषु च यथा यथा राशि स्थान स्थितेषु सत्सु एवं ग्रह गुणगण विशेषण विशिष्टायाँ अमुक नाम्नोअहं अमुक गोत्रोउत्पन्नोअहम् सपरिवारस्य सकुटुंबस्य श्री अमुक देवता प्रीत्यर्थे पूजनं च अहं करिष्ये। मंत्र पढ़ने के बाद हाथ की सामग्री को देवता के सामने या नीचे छोड़ दें।

❖ गणपति का आवाहन एवं पूजन

श्रीगौरीपुत्र गणेश का ध्यान करते हुए निम्न मंत्र पड़ते हुए आवाहन करें: गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्।। विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय, लम्बोदराय सकलायजगद्विताय। नागाननाय श्रुति यज्ञविभूषिताय, गौरी सुतायगणनाथ नमो नमस्ते॥ ॐ गणानां त्वा गणपति गूम हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपति गूम हवामहे निधीनां त्वा निधिपति गूम हवामहे वसो मम। आहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्।। एह्येहि हेरम्ब महेशपुत्र ! समस्तविघ्नौघविनाशदक्ष !। माङ्गल्यपूजाप्रथमप्रधान गृहाण पूजां भगवन् ! नमस्ते।। ॐ भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय गणपतये नमः, गणपतिमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च। हाथ की सामग्री को गणेश जी को अर्पित कर दें।

❖ महादेव का आवाहन एवं पूजन

ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन । तव ध्यानेन देवेश मृत्युप्राप्नोति जीवती ।। वन्दे ईशान देवाय नमस्तस्मै पिनाकिने । आदिमध्यांत रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। नमस्तस्मै भगवते कैलासाचल वासिने । नमोब्रह्मेन्द्र रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। त्र्यंबकाय नमस्तुभ्यं पंचस्याय नमोनमः । नमो दोर्दण्डचापाय मम मृत्युम् विनाशय ।। नमोर्धेन्दु स्वरूपाय नमो दिग्वसनाय च । नमो भक्तार्ति हन्त्रे च मम मृत्युं विनाशय ।। देवं मृत्युविनाशनं भयहरं साम्राज्य मुक्ति प्रदम् । नाना भूतगणान्वितं दिवि पदैः देवैः सदा सेवितम् ।। अज्ञानान्धकनाशनं शुभकरं विध्यासु सौख्य प्रदम् । सर्व सर्वपति महेश्वर हरं मृत्युंजय भावये ।। ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् श्रीसदाशिव आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च। हाथ की सामग्री को भगवान शंकर को अर्पित कर दें।

❖ देवी दुर्गा का आवाहन एवं पूजन

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः। नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्मताम्।। या देवी सर्व भूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ श्री दुर्गादेव्यै ध्यानं समर्पयामि, आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च। हाथ की सामग्री को जगतमाता दुर्गा को अर्पित कर दें।

❖ भगवान विष्णु का आवाहन एवं पूजन

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् । लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥ ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्। श्रीभगवान विष्णुः ध्यानं समर्पयामि, आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च। हाथ की सामग्री को परमेश्वर भगवान विष्णु को अर्पित कर दें।

❖ गुरु गोविन्द का आवाहन एवं पूजन

गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः गुरू साक्षात परंब्रह्म तस्मै श्री गुरूवे नमः॥ अखंड मंडलाकारं व्याप्तं येन चराचरं, तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरुवे नमः ॥ ॐ परम तत्वाय नारायण गुरुभ्यों नम: ध्यानं समर्पयामि, आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च। हाथ की सामग्री को परम पूज्य गुरुदेव को अर्पित कर दें।

❖ नवग्रह का आवाहन एवं पूजन

ब्रह्मा मुरारिः त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु॥ हाथ की सामग्री को नवग्रह मंडल को अर्पित कर दें, अगर नवग्रह मंडल नहीं बनाया है तो सामने अर्पित कर दें नवग्रह देवताओं का ध्यान करते हुए।

❖ कलश स्थापना एवं पूजन

एक मिट्टी, ताम्बे या पीतल का कलश लेकर उसमें जल भर लें, कलश में पुष्प, अक्षत, रोली, सिक्का तथा गोल सुपारी डाले। अशोक या आम के पांच पत्ते कलश डालें, कलश के मुख पर मिट्टी या किसी और धातु की अक्षत से भरी हुई प्लेट रखें और फिर उसपे लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल स्थापित करे। सभी तीर्थो के जल का आवाहन कुम्भ कलश में करें। ऊँ कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रूद्रः समाश्रितः। मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः।। गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति । नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू ।। अस्मिन् कलशे सर्वाणि तीर्थान्यावाहयामि नमस्करोमि। उपरोक्त मंत्र पढ़ते हुए कलश कुम्भ देवता को नमस्कार करें।

❖ दीप देवता की गन्धाक्षत, पुष्प से पूजा करें

देवता के दाएं तरफ दीपक स्थापित करें एवं दीप देवता की गन्धाक्षत, पुष्प से पूजा करें। ॐ अग्निर्ज्योति: ज्योतिरग्निः स्वाहा सूर्यो ज्योति: ज्योति: सूर्य: स्वाहा, अग्निर्वर्च ज्योतिर्वर्चः स्वाहा सूर्योवर्च ज्योतिर्वर्चः स्वाहा, ज्योतिः सूर्य: सूर्यःज्योतिः स्वाहा। शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा, शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोस्तुते।

❖ सभी देवताओं का आवाहन एवं पूजन

श्रीमन्महागणाधिपतये नमः। लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः। उमामहेश्वराभ्यां नमः। वाणीहिरण्यगर्भाभ्यां नमः। शचीपुरन्दराभ्यां नमः। मातापितृचरणकमलेभ्यो नमः। इष्टदेवताभ्यो नमः। कुलदेवताभ्यो नमः। ग्रामदेवताभ्यो नमः। वास्तुदेवताभ्यो नमः। स्थानदेवताभ्यो नमः। सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः। सर्वेभ्यो ब्राह्मणेभ्यो नमः। सभी इष्ट देवताओं का ध्यान करते हुए सामग्री अर्पित कर दें।

❖ क्षमा प्रार्थना

पूजा में हुई त्रुटियों के लिए प्रभु से क्षमा याचना करें आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनं, पूजां चैव न जानामि क्षम्यतां परमेश्वरा, मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं तथैव च, यद्पूजितम मयादेव, परिपूर्णं तदस्तु में।। ऊँ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख-भाग्भवेत् ।


मंदिर का पता

देवहार, अंधराठाढ़ी, मधुबनी,
बिहार, पिनकोड 847224, IN

समय - सारणी

प्रातः 05:00 AM - अपराह्न 12:00 PM
अपराह्न 04:00 PM - रात्रि 09:00 PM
प्रातःकालीन महाश्रृंगार एवं महाआरती 05:30 AM
संध्याकालीन महाश्रृंगार एवं महाआरती 08:30 PM

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