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॥ श्री हरि विष्णु जी की आरती ॥

ॐ जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट, छन में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे
जो ध्यावै फल पावै, दु:ख बिनसै मनका।
सुख सम्पत्ति घर आवै, कष्ट मिटै तनका॥ ॐ जय जगदीश हरे
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पार ब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मुरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमती॥ ॐ जय जगदीश हरे
दीनबन्धु, दु:खहर्ता तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पडा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे

॥ श्री सत्यानारयण जी की आरती ॥

ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा रत्नजडित सिंहासन, अद्भुत छवि राजें । नारद करत निरतंर घंटा ध्वनी बाजें ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी.... प्रकट भयें कलिकारण, द्विज को दरस दियो । बूढों ब्राम्हण बनके, कंचन महल कियों ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... दुर्बल भील कठार, जिन पर कृपा करी । च्रंदचूड एक राजा तिनकी विपत्ति हरी ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... वैश्य मनोरथ पायों, श्रद्धा तज दिन्ही । सो फल भोग्यों प्रभूजी, फेर स्तुति किन्ही ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... भाव भक्ति के कारन .छिन छिन रुप धरें । श्रद्धा धारण किन्ही, तिनके काज सरें ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... ग्वाल बाल संग राजा, वन में भक्ति करि । मनवांचित फल दिन्हो, दीन दयालु हरि ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... चढत प्रसाद सवायों, दली फल मेवा । धूप दीप तुलसी से राजी सत्य देवा ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... सत्यनारायणजी की आरती जो कोई नर गावे । ऋद्धि सिद्धी सुख संपत्ति सहज रुप पावे ॥ ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी..... ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा ॥

॥ श्री रामचन्द्र जी की आरती ॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं।
नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं। श्री राम श्री राम....
कंदर्प अगणित अमित छबि, नव नील नीरद सुन्दरं।
पट पीत मानहु तडीत रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरं।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं। श्री राम श्री राम....
भजु दीनबंधु दिनेश दानवदै त्यवंशनिकंदनं। रघुनंद आंनद कंद कोशल चंद दशरथनंदनं।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं। श्री राम श्री राम...
सिर मुकुट कूंडल तिलक चारु उदारु अंग विभुषणं।
आजानु भुजा शरा चाप धरा, संग्राम जित खर दुषणं।। श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं
इति वदित तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनं।
मम ह्रदय कंज निवास कुरु, कमदि खल दल गंजनं।।
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणं। नवकंज लोचन, कंजमुख, करकुंज, पदकंजारुणं।। श्री राम श्री राम...

॥ श्री हनुमान जी की आरती ॥

आरती कीजे हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट ना झाँके॥
अंजनी पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥
दे वीरा रघुनाथ पठाये।
लंका जाये सिया सुधी लाये॥
लंका सी कोट संमदर सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥
लंका जारि असुर संहारे।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥ लक्ष्मण मुर्छित पडे सकारे । आनि संजीवन प्राण उबारे ॥ पैठि पताल तोरि जम कारे। अहिरावन की भुजा उखारे ॥ बायें भुजा असुर दल मारे । दाहीने भुजा सब संत जन उबारे ॥ सुर नर मुनि जन आरती उतारे । जै जै जै हनुमान उचारे ॥ कचंन थाल कपूर लौ छाई । आरती करत अंजनी माई ॥ जो हनुमान जी की आरती गाये । बसहिं बैकुंठ परम पद पायै ॥ लंका विध्वंस किये रघुराई । तुलसीदास स्वामी कीर्ती गाई ॥ आरती कीजे हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

॥ श्री शिव जी की आरती ॥

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं । सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥ जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा । ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... एकानन चतुरानन पंचांनन राजे । हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें । तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी । चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगें सनकादिक, ब्रम्हादिक, भूतादिक संगें ॐ जय शिव ओंकारा...... कर के मध्य कमड़ंल चक्र, त्रिशूल धरता । जगकर्ता, जगभर्ता, जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रवणाक्षर मध्यें ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रम्हचारी । नित उठी भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा...... त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावें । कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावें ॥ ॐ जय शिव ओंकारा..... जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा। ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा......

॥ श्री कृष्ण जी की आरती ॥

ॐ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे भक्तन के दुख टारे पल में दूर करे. जय जय श्री कृष्ण हरे.... परमानन्द मुरारी मोहन गिरधारी. जय रस रास बिहारी जय जय गिरधारी. जय जय श्री कृष्ण हरे.... कर कंचन कटि कंचन श्रुति कुंड़ल माला मोर मुकुट पीताम्बर सोहे बनमाला. जय जय श्री कृष्ण हरे.... दीन सुदामा तारे, दरिद्र दुख टारे. जग के फ़ंद छुड़ाए, भव सागर तारे. जय जय श्री कृष्ण हरे.... हिरण्यकश्यप संहारे नरहरि रुप धरे. पाहन से प्रभु प्रगटे जन के बीच पड़े. जय जय श्री कृष्ण हरे.... केशी कंस विदारे नर कूबेर तारे. दामोदर छवि सुन्दर भगतन रखवारे. जय जय श्री कृष्ण हरे.... काली नाग नथैया नटवर छवि सोहे. फ़न फ़न चढ़त ही नागन, नागन मन मोहे. जय जय श्री कृष्ण हरे.... राज्य विभिषण थापे सीता शोक हरे. द्रुपद सुता पत राखी करुणा लाज भरे. जय जय श्री कृष्ण हरे.... ॐ जय श्री कृष्ण हरे.

॥ श्री कुंज बिहारी की आरती ॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला। श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला। गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली । लतन में ठाढ़े बनमाली;भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक;ललित छवि श्यामा प्यारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की... कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं । गगन सों सुमन रासि बरसै;बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग;अतुल रति गोप कुमारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की... जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा । स्मरन ते होत मोह भंगा;बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच;चरन छवि श्रीबनवारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की... चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू । चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू;हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद;टेर सुन दीन भिखारी की ॥ श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की

॥ श्री शनि देव जी की आरती ॥

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥ श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय.॥ किरीट मुकुट शीश रजित दीपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय.॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय.॥ देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥जय.॥

॥ श्री बृहस्पति देव की आरती ॥

जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा । छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी । जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता । सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥ तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े । प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥ दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी । पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥ सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो । विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥ जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे । जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे ॥

॥ श्री दुर्गा जी की आरती ॥

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।। जय अम्बे गौरी ॥ माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को । मैया टीको मृगमद को उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।। जय अम्बे गौरी ॥ कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे। मैया रक्ताम्बर साजे रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे।। जय अम्बे गौरी ॥ केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी। मैया खड्ग कृपाण धारी सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी।। जय अम्बे गौरी ॥ कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती। मैया नासाग्रे मोती कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति।। जय अम्बे गौरी ॥ शम्भु निशम्भु बिडारे महिषासुर घाती। मैया महिषासुर घाती धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती।। जय अम्बे गौरी ॥ चण्ड मुण्ड शोणित बीज हरे। मैया शोणित बीज हरे मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे।। जय अम्बे गौरी ॥ ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी। मैया तुम कमला रानी आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी।। जय अम्बे गौरी ॥ चौंसठ योगिन गावत नृत्य करत भैरों। मैया नृत्य करत भैरों बाजत ताल मृदंग और बाजत डमरू।। जय अम्बे गौरी ॥ तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता। मैया तुम ही हो भर्ता भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता।। जय अम्बे गौरी ॥ भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी। मैया वर मुद्रा धारी मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी।। जय अम्बे गौरी ॥ कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती। मैया अगर कपूर बाती माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती।। बोलो जय अम्बे गौरी ॥ माँ अम्बे की आरती जो कोई नर गावे। मैया जो कोई नर गावे कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे।। जय अम्बे गौरी ॥

॥ श्री पार्वती जी की आरती ॥

जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्मा सनातन देवी शुभफल की दाता ।। अरिकुलापदम विनाशिनी जय सेवक त्राता, जगजीवन जगदंबा हरिहर गुणगाता ।। सिंह को बाहन साजे कुण्डल हैं साथा, देबबंधु जस गावत नृत्य करा ताथा ।। सतयुग रूपशील अतिसुन्दर नाम सती कहलाता, हेमाचल घर जन्मी सखियन संग राता ।। शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमाचल स्थाता, सहस्त्र भुजा धरिके चक्र लियो हाथा ।। सृष्टिरूप तुही है जननी शिव संगरंग राता, नन्दी भृंगी बीन लही है हाथन मद माता ।। देवन अरज करत तब चित को लाता, गावन दे दे ताली मन में रंगराता ।। श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता , सदा सुखी नित रहता सुख सम्पति पाता ।।

॥ श्री सरस्वती जी की आरती ॥

ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता, सदगुण वैभवशालिनि, त्रिभुवन विख्याता || जय जय सरस्वती माता, ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता || चंद्रवदन पदमासिनी कृति मंगलकारी, सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेज धारी || जय जय सरस्वती माता, ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता || बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला, शीश मुकुटमणि सोहे, गल मोतियन माला || जय जय सरस्वती माता, ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता || देवि शरण जो आए, उनका उद्धार किया, बैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया || जय जय सरस्वती माता, ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता || विद्यादान प्रदायिनि ज्ञान-प्रकाश भरो, मोह, अज्ञान की निरखा, जग से नाश करो || जय जय सरस्वती माता, ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता || धूप, दीप, फल, मेवा, ओ मां स्वीकार करो, ज्ञान-चक्षु दे माता, जग निस्तार करो || जय जय सरस्वती माता ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता || मां सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावै, हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावै || जय जय सरस्वती माता, ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता || ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता, सदगुण वैभवशालिनि, त्रिभुवन विख्याता || जय जय सरस्वती माता, ॐ जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ||

॥ श्री लक्ष्मी जी की आरती ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता | तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु धाता || ॐ जय लक्ष्मी माता || उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता | सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता || ॐ जय लक्ष्मी माता || दुर्गा रुप निरंजनी, सुख-सम्पत्ति दाता | जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता || ॐ जय लक्ष्मी माता || तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभ दाता | कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता || ॐ जय लक्ष्मी माता || जिस घर में तुम रहतीं, तहाँ सब सद्गुण आता | सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता || ॐ जय लक्ष्मी माता || तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता | खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता || ॐ जय लक्ष्मी माता || शुभ-गुण-मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता | रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता || ॐ जय लक्ष्मी माता || महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता | उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता || ॐ जय लक्ष्मी माता || ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता | तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु धाता || ॐ जय लक्ष्मी माता ||

॥ श्री रामायण जी की आरती ॥

आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद। बालमीक विज्ञान विशारद। शुक सनकादि शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥ आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ गावत वेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस। मुनि-मन धन सन्तन को सरबस। सार अंश सम्मत सबही की॥ आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ गावत सन्तत शम्भू भवानी। अरु घट सम्भव मुनि विज्ञानी। व्यास आदि कविबर्ज बखानी। कागभुषुण्डि गरुड़ के ही की॥ आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ कलिमल हरनि विषय रस फीकी। सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की। दलन रोग भव मूरि अमी की। तात मात सब विधि तुलसी की॥ आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥

॥ श्री गंगा जी की आरती ॥

ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता। कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता। यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता। सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥


मंदिर का पता

देवहार, अंधराठाढ़ी, मधुबनी,
बिहार, पिनकोड 847224, IN

समय - सारणी

प्रातः 05:00 AM - अपराह्न 12:00 PM
अपराह्न 04:00 PM - रात्रि 09:00 PM
प्रातःकालीन महाश्रृंगार एवं महाआरती 05:30 AM
संध्याकालीन महाश्रृंगार एवं महाआरती 08:30 PM

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